PM Kisan New Update – प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की शुरुआत से लेकर अब तक देश भर के लाखों कृषक परिवारों को आर्थिक मदद मिलती रही है। हाल ही में केंद्र सरकार ने इस कल्याणकारी योजना में कुछ अहम बदलाव किए हैं जिनकी जानकारी हर पंजीकृत किसान को होनी आवश्यक है। ये संशोधन मुख्य रूप से योजना की पारदर्शिता को मजबूत करने और गलत तरीके से लाभ लेने वालों की पहचान करने के लिए किए गए हैं।
वर्ष 2019 में लांच हुई इस योजना के माध्यम से छोटे और सीमांत कृषकों को वार्षिक छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह धनराशि तीन बराबर हिस्सों में यानी हर चार महीने पर दो-दो हजार रुपये की किस्त के रूप में सीधे लाभार्थी के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर होती है। अब नए दिशा-निर्देशों के तहत किसानों को कुछ अतिरिक्त शर्तों को पूरा करना होगा।
इलेक्ट्रॉनिक केवाईसी की बाध्यता
सरकार ने अब डिजिटल वेरिफिकेशन को अनिवार्य कर दिया है और बिना इसके आने वाली किश्तों का भुगतान रोक दिया जाएगा। किसान तीन विभिन्न माध्यमों से अपना ई-केवाईसी संपन्न कर सकते हैं। सबसे आसान तरीका है मोबाइल पर आए वन टाइम पासवर्ड से वेरिफिकेशन करना। दूसरा विकल्प है बायोमेट्रिक उंगलियों के निशान के माध्यम से पहचान की पुष्टि। तीसरा और नवीनतम तरीका है फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी जो खासतौर पर उन वृद्ध कृषकों के लिए सुविधाजनक है जिनके फिंगरप्रिंट्स ठीक से स्कैन नहीं होते।
यह प्रक्रिया कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर पूरी की जा सकती है या फिर घर बैठे स्मार्टफोन एप्लिकेशन के जरिए भी यह काम हो सकता है। यह कदम धोखाधड़ी को रोकने और सही लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
विशिष्ट कृषक पहचान संख्या का प्रावधान
अब प्रत्येक कृषक को एक यूनीक आईडी नंबर मिलेगा जो उनकी विशिष्ट पहचान बनेगा। यह संख्या आगे चलकर सभी कृषि संबंधित सरकारी स्कीमों का फायदा उठाने के लिए जरूरी होगी। इस डिजिटल पहचान के जरिए सरकार किसानों का एक व्यापक डेटा संग्रह तैयार करेगी जिसमें भूमि की पूरी जानकारी, फसल का ब्यौरा और मिलने वाली सहायता का संपूर्ण लेखा-जोखा शामिल होगा।
इस व्यवस्था से एक महत्वपूर्ण फायदा यह होगा कि कोई भी व्यक्ति अलग-अलग नामों या दस्तावेजों से कई बार लाभ नहीं ले पाएगा। यह प्रणाली डुप्लीकेट लाभार्थियों को पकड़ने में मददगार साबित होगी और सरकारी खजाने से होने वाले अनावश्यक खर्च को रोकेगी।
जमीन का डिजिटल सत्यापन जरूरी
भूमि संबंधी दस्तावेजों का ऑनलाइन वेरिफिकेशन अब अनिवार्य शर्त बन गई है। लैंड सीडिंग प्रक्रिया के तहत किसानों को अपनी कृषि भूमि के कागजात पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। यदि सिस्टम में आपकी भूमि सत्यापन की स्थिति रिजेक्टेड या पेंडिंग दिखती है तो किस्त का पैसा रुक सकता है।
खसरा-खतौनी, भू-अभिलेख और अन्य जमीन से जुड़े प्रमाण पत्रों को डिजिटल रूप से सबमिट करना होगा। यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि केवल असली और वास्तविक कृषक ही योजना का फायदा उठा सकें। जिन किसानों के पास खुद की कृषि योग्य भूमि नहीं है वे इस योजना के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे।









